Zohar Ki Namaz Ka Tarika In Hindi | Zohar Ki Namaz Rakat | Best 1 Solutions Zohar Ki Namaz Ka Tarika

आज की लेख  में हम Zohar Ki Namaz Ka Tarika In Hindi के बारे में जानेंगे ज़ोहर  की नमाज को किस तरह से अदा की जाती है ज़ोहर  की नमाज कब अदा की जाती है ज़ोहर  की नमाज में कितनी रकात हैं आज के इस लेख में हम पूरी तरीके से जानेंगे कि कैसे ज़ोहर  की नमाज पढ़ी जाती है मुझे उम्मीद है आप सभी को यह लेख पसंद आएगी और इससे आपको हेल्प मिलेगा

अगर आप भी ज़ोहर  की नमाज का तरीका के बारे में सर्च कर रहे हैं तो आप सही जगह पर आए हैं आपको इस लेख में ज़ोहर  की नमाज के बारे में पूरा डिटेल मिलेगा और आप अच्छे से समझ पाएंगे और आप ज़ोहर  की नमाज को सही तरीके से पढ़ पाएंगे

अल्लाह ताला ने हम पर पांच नमाजे फ़र्ज़ की  है आज के इस लेख में हम ज़ोहर  की नमाज के बारे में जानेंगे ज़ोहर  की नमाज पांचों नमाज़ में से ये दूसरे नंबर परकी फ़र्ज़ नमाज़ है ज़ोहर  की नमाज में कुल 12 रकात है चलिए ज़ोहर  की नमाज का तरीका के बारे में अच्छी तरीके से जानते हैं

Zohar Ki Namaz Rakat , Zohar Ki Namaz Ka Tarika

Zohar Ki Namaz Ka Tarika In Hindi | Zohar Ki Namaz Rakat :

ज़ोहर  की नमाज में कुल 12 रकात है आइये अब हम जानते हैं ज़ोहर की नमाज में कुल कितनी रकात  हैं और कौन सी रकाते पहले अदा की जाती है जोहर की नमाज में कुल 12 रकात है सबसे पहले चार रकात सुन्नते मुअक्किदा है फिर इसके बाद चार रकात फर्ज नमाज़ है फिर इसके बाद दो रकात सुन्नते मुअक्किदा है और फिर इसके बाद दो रकात नफिल नमाज है यह जोहर के कुल 12 रकात हैं 

  • 4 रकात सुन्नत मुअक्किदा
  • 4 रकात फर्ज नमाज़ 
  • 2 रकात सुन्नत मुअक्किदा
  • 2 रकात नफिल

Zohar Ki Namaz Ki Niyat Kaise Kare : zohar ki namaz ka tarika :

ज़ोहर  की नमाज की नियत आइये जानते हैं हम कैसे करेंगे अगर हम सुन्नत नमाज़ पढ़ रहे हैं तो कैसे किया जाएगा और फर्ज नमाज पढ़ रहे हैं तो उस वक्त कैसे किया जाएगा

  • 4 रकात सुन्नत की नियत

नियत करता हूं मैं 4 रकात सुन्नत नमाज ज़ोहर  की वास्ते अल्लाह ताआला के मुंह मेरा काबा शरीफ के तरफ अल्लाहू अकबर

  • ज़ोहर  की 4 रकात फर्ज नमाज की नियत

नियत की मैंने 4 चार रकआत फर्ज नमाज ज़ोहर  की वास्ते अल्लाह तआला के मुंह मेरा कआबा शरीफ की तरफ अल्लाहु अकबर

Note : ध्यान रहे आप इमाम के पीछे नमाज पढ़ रहे हैं तो आपको नीचे दिए गए इस तरह से 4 रकात फर्ज नमाज़ की नियत करनी है

नियत करता हूं मैं 4 रकात फ़र्ज़ नमाज ज़ोहर  की वास्ते अल्लाह ताआला के पीछे इस इमाम के मुंह मेरा काबा शरीफ के तरफ अल्लाहू अकबर

  • 2 रकात सुन्नत की नियत

नियत करता हूं मैं 2 रकात सुन्नत नमाज ज़ोहर  की वास्ते अल्लाह ताआला के मुंह मेरा काबा शरीफ के तरफ अल्लाहू अकबर

  • 2 रकात नफिल की नियत

नियत करता हूं मैं 2 रकात नफिल नमाज ज़ोहर  की वास्ते अल्लाह ताआला के मुंह मेरा काबा शरीफ के तरफ अल्लाहू अकबर

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ज़ोहर  की नमाज़ से जुडी कुछ हदीस : Namaz Ki Hadees In Hindi :

कि नबी करीम (सल्ल०) के मुअज़्ज़न (बिलाल) ने ज़ोहर की अज़ान दी तो आप (सल्ल०) ने फ़रमाया कि ठण्डा कर  ठण्डा कर  या ये फ़रमाया कि इन्तिज़ार कर  इन्तिज़ार कर  और फ़रमाया कि गर्मी की तेज़ी जहन्नम की आग की भाप से है। इसलिये जब गर्मी सख़्त हो जाए तो नमाज़ ठण्डे वक़्त मैं पढ़ा करो  फिर ज़ोहर की अज़ान उस वक़्त कही गई जब हमने टीलों के साये देख लिये। Sahih Bukhari Hadees No 535

नबी करीम (सल्ल०) ने फ़रमाया, (कि गर्मी के मौसम में) ज़ोहर को ठण्डे वक़्त मैं पढ़ा करो  क्योंकि गर्मी की शिद्दत जहन्नम की भाप से पैदा होती है। इस हदीस की पैरवी सुफ़ियान सौरी  यहया और अबू-अवाना ने आमश के वास्ते से की है। Sahih Bukhari Hadees No 538

हम एक सफ़र में रसूलुल्लाह (सल्ल०) के साथ थे। मुअज़्ज़न ने चाहा कि ज़ोहर की अज़ान दे। लेकिन आप (सल्ल०) ने फ़रमाया कि वक़्त को ठण्डा होने दो  मुअज़्ज़न ने (थोड़ी देर बाद) फिर चाहा कि अज़ान दे  लेकिन आप (सल्ल०) ने फ़रमाया कि ठण्डा होने दो। जब हमने टीले का साया ढला हुआ देख लिया। 

(तब अज़ान कही गई) फिर नबी करीम (सल्ल०) ने फ़रमाया कि गर्मी की तेज़ी जहन्नम की भाप की तेज़ी से है। इसलिये जब गर्मी सख़्त हो जाया करे तो ज़ोहर की नमाज़ ठण्डे वक़्त मैं पढ़ा करो। इब्ने-अब्बास (रज़ि०) ने फ़रमाया, ( يتفيئو ) (का लफ़्ज़ जो सूरा नहल मैं है) के माने (झुकना, माइल होना) हैं। Sahih Bukhari Hadees No 539

नबी करीम (सल्ल०) सुबह की नमाज़ उस वक़्त पढ़ते थे जब हम अपने पास बैठे हुए शख़्स को पहचान लेते थे। सुबह की नमाज़ में नबी करीम (सल्ल०) साठ से सौ तक आयतें पढ़ते। और आप (सल्ल०) ज़ोहर उस वक़्त पढ़ते जब सूरज ढल जाता। और अस्र की नमाज़ उस वक़्त कि हम मदीना मुनव्वरह की आख़िरी हद तक (नमाज़ पढ़ने के बाद) जाते लेकिन सूरज अब भी तेज़ रहता था। 

नमाज़ मग़रिब का अनस (रज़ि०) ने जो वक़्त बताया था वो मुझे याद नहीं रहा। और नबी करीम (सल्ल०) इशा की नमाज़ को तिहाई रात तक देर करने में कोई हरज नहीं समझते थे  फिर अबू-मिन्हाल ने कहा कि आधी रात तक (देर करने में) कोई हरज नहीं समझते थे। और मुआज़ ने कहा कि शोबा ने फ़रमाया कि फिर मैं दोबारा अबू-मिन्हाल से मिला तो उन्होंने फ़रमाया : या तिहाई रात तक। Sahih Bukhari Hadees No 541

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