Tahajjud Ki Namaz Ka Tarika | How To Pray Tahajjud ki Namaz In Hindi | Tahajjud Namaz

Tahajjud Ki Namaz Ka Tarika, हमारे नबी सल्ललाहु अलैहि वसल्लम ने जो तरीक़ा बताया है उसी तरीक़ी से तहज्जुद के बारे में जानेंगे, Tahajjud Namaz इस लेख में हम ने तहज्जुद से जुडी सहीह बुखारी की हदीस बताया है। How To Pray Tahajjud Namaz, Tahajjud Namaz Rakat

तहज्जुद की नमाज़ Tahajjud Ki Namaz Ka Tarika हदीस में :

Tahajjud ki namaz ka tarika , tahajjud ki dua

حَدَّثَنَا مُسَدَّدٌ ، قَالَ : حَدَّثَنَا بِشْرُ بْنُ الْمُفَضَّلِ ، عَنْ عُبَيْدُ اللَّهِ ، عَنْ نَافِعٍ ، عَنْ ابْنِ عُمَرَ ، قَالَ : سَأَلَ رَجُلٌ النَّبِيَّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ وَهُوَ عَلَى الْمِنْبَرِ ، مَا تَرَى فِي صَلَاةِ اللَّيْلِ ؟ قَالَ : مَثْنَى مَثْنَى ، فَإِذَا خَشِيَ الصُّبْحَ صَلَّى وَاحِدَةً فَأَوْتَرَتْ لَهُ مَا صَلَّى ، وَإِنَّهُ كَانَ يَقُولُ : اجْعَلُوا آخِرَ صَلَاتِكُمْ وِتْرًا ، فَإِنَّ النَّبِيَّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أَمَرَ بِهِ .

एक शख़्स ने नबी करीम (सल्ल०) से पूछा (जबकि) उस वक़्त आप (सल्ल०) मेम्बर पर थे कि रात की नमाज़ (यानी तहज्जुद) किस तरह पढ़ने के लिये आप फ़रमाते हैं? आप (सल्ल०) ने फ़रमाया कि दो-दो रकअत करके पढ़ और जब सुबह क़रीब होने लगे तो एक रकअत पढ़ ले।

ये एक रकअत इस सारी नमाज़ को ताक़ बना देगी और आप (सल्ल०) फ़रमाया करते थे कि रात की आख़िरी नमाज़ को ताक़ रखा करो क्योंकि नबी करीम (सल्ल०) ने उसका हुक्म दिया। सहीह बुखारी Hadees No 272 ।

حَدَّثَنَا سُلَيْمَانُ بْنُ حَرْبٍ ، قَالَ : حَدَّثَنَا شُعْبَةُ ، عَنْ الْحَكَمِ ، قَالَ : سَمِعْتُ سَعِيدَ بْنَ جُبَيْرٍ ، عَنِ ابْنِ عَبَّاسٍ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُمَا ، قَالَ : بِتُّ فِي بَيْتِ خَالَتِي مَيْمُونَةَ فَصَلَّى رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ الْعِشَاءَ ، ثُمَّ جَاءَ فَصَلَّى أَرْبَعَ رَكَعَاتٍ ، ثُمَّ نَامَ ، ثُمَّ قَامَ فَجِئْتُ فَقُمْتُ عَنْ يَسَارِهِ فَجَعَلَنِي عَنْ يَمِينِهِ فَصَلَّى خَمْسَ رَكَعَاتٍ ، ثُمَّ صَلَّى رَكْعَتَيْنِ ، ثُمَّ نَامَ حَتَّى سَمِعْتُ غَطِيطَهُ أَوْ قَالَ خَطِيطَهُ ، ثُمَّ خَرَجَ إِلَى الصَّلَاةِ .

एक रात में अपनी ख़ाला उम्मुल-मोमिनीन मैमूना (रज़ि०) के घर पर रह गया। रसूलुल्लाह (सल्ल०) इशा की नमाज़ के बाद जब उन के घर तशरीफ़ लाए तो यहाँ चार रकअत नमाज़ पढ़ी। फिर आप (सल्ल०) सो गए फिर नमाज़ (तहज्जुद के लिये) आप (सल्ल०) उठे (और नमाज़ पढ़ने लगे ) तो मैं भी उठ कर आप (सल्ल०) की बाईं तरफ़ खड़ा हो गया।

लेकिन आप (सल्ल०) ने मुझे अपनी दाहिनी तरफ़ कर लिया। आप (सल्ल०) ने पाँच रकअत नमाज़ पढ़ी। फिर दो रकअत (सुन्नत फ़ज्र) पढ़ कर सो गए और मैंने आप (सल्ल०) के ख़र्राटे की आवाज़ भी सुनी। फिर आप (सल्ल०) फ़ज्र की नमाज़ के लिये बरआमद हुए। सहीह बुखारी Hadees No 697।

حَدَّثَنَا قُتَيْبَةُ بْنُ سَعِيدٍ ، قَالَ : حَدَّثَنَا دَاوُدُ ، عَنْ عَمْرِو بْنِ دِينَارٍ ، عَنْ كُرَيْبٍ مَوْلَى ابْنِ عَبَّاسٍ ، عَنِ ابْنِ عَبَّاسٍ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُمَا ، قَالَ : صَلَّيْتُ مَعَ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ ذَاتَ لَيْلَةٍ ، فَقُمْتُ عَنْ يَسَارِهِ فَأَخَذَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ بِرَأْسِي مِنْ وَرَائِي فَجَعَلَنِي عَنْ يَمِينِهِ فَصَلَّى وَرَقَدَ ، فَجَاءَهُ الْمُؤَذِّنُ فَقَامَ وَصَلَّى وَلَمْ يَتَوَضَّأْ

एक रात मैंने नबी करीम (सल्ल०) के साथ (आप के घर में तहज्जुद की) नमाज़ पढ़ी। मैं आपके बाएँ तरफ़ खड़ा हो गया। इसलिये आप (सल्ल०) ने पीछे से मेरा सिर पकड़ कर मुझे अपने दाएँ तरफ़ कर दिया। फिर नमाज़ पढ़ी और आप (सल्ल०) सो गए जब मुअज़्ज़न (नमाज़ की इत्तिला देने) आया तो आप (सल्ल०) नमाज़ पढ़ाने के लिये खड़े हुए और वुज़ू नहीं किया। सहीह बुखारी Hadees No 726।

حَدَّثَنَا مُوسَى، حَدَّثَنَا ثَابِتُ بْنُ يَزِيدَ، حَدَّثَنَا عَاصِمٌ، عَنْ الشَّعْبِيِّ، عَنْ ابْنِ عَبَّاسٍ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُمَا، قَالَ:” قُمْتُ لَيْلَةً أُصَلِّي عَنْ يَسَارِ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ، فَأَخَذَ بِيَدِي أَوْ بِعَضُدِي حَتَّى أَقَامَنِي عَنْ يَمِينِهِ، وَقَالَ: بِيَدِهِ مِنْ وَرَائِي”.

मैं एक रात नबी करीम (सल्ल०) के बाएँ तरफ़ (आप (सल्ल०) के घर में) नमाज़ (तहज्जुद) पढ़ने के लिये खड़ा हो गया। इसलिये आप (सल्ल०) ने मेरा सिर या बाज़ू पकड़ कर मुझको अपनी दाईं तरफ़ खड़ा कर दिया। आप (सल्ल०) ने अपने हाथ से इशारा किया था कि पीछे से घूम आओ।सहीह बुखारी Hadees No 728।

حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ ، قَالَ : أَخْبَرَنَا عَبْدَةُ ، عَنْ يَحْيَى بْنِ سَعِيدٍ الْأَنْصَارِيِّ ، عَنْ عَمْرَةَ ، عَنْ عَائِشَةَ ، قَالَتْ : كَانَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يُصَلِّي مِنَ اللَّيْلِ فِي حُجْرَتِهِ وَجِدَارُ الْحُجْرَةِ قَصِيرٌ ، فَرَأَى النَّاسُ شَخْصَ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ ، فَقَامَ أُنَاسٌ يُصَلُّونَ بِصَلَاتِهِ فَأَصْبَحُوا فَتَحَدَّثُوا بِذَلِكَ ، فَقَامَ اللَّيْلَةَ الثَّانِيَةَ فَقَامَ مَعَهُ أُنَاسٌ يُصَلُّونَ بِصَلَاتِهِ ، صَنَعُوا ذَلِكَ لَيْلَتَيْنِ أَوْ ثَلَاثًا حَتَّى إِذَا كَانَ بَعْدَ ذَلِكَ جَلَسَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَلَمْ يَخْرُجْ فَلَمَّا أَصْبَحَ ذَكَرَ ذَلِكَ النَّاسُ فَقَالَ : إِنِّي خَشِيتُ أَنْ تُكْتَبَ عَلَيْكُمْ صَلَاةُ اللَّيْلِ

और हज़रत इमाम हसन बसरी ने फ़रमाया कि अगर इमाम के और तुम्हारे बीच नहर हो जब भी नमाज़ पढ़ने में कोई हरज नहीं और अबू मजलिज़ ताबई ने फ़रमाया कि अगर इमाम और मुक़्तदी के बीच कोई रास्ता या दीवार रुकावट हो जब भी पैरवी कर सकता है बशर्ते कि इमाम की तकबीर सुन सकता हो।

हदीस: रसूलुल्लाह (सल्ल०) रात में अपने हुजरे के अन्दर (तहज्जुद की) नमाज़ पढ़ते थे। हुजरे की दीवारें छोटी थीं इसलिये लोगों ने नबी करीम (सल्ल०) को देख लिया और कुछ लोग आप (सल्ल०) की पैरवी मैं नमाज़ के लिये खड़े हो गए। सुबह के वक़्त लोगों ने उसका ज़िक्र दूसरों से किया। फिर जब दूसरी रात आप (सल्ल०) खड़े हुए तो कुछ लोग आप (सल्ल०) की पैरवी मैं इस रात भी खड़े हो गए।

ये सूरत दो या तीन रात तक रही। उसके बाद रसूलुल्लाह (सल्ल०) बैठ रहे और नमाज़ के मक़ाम पर तशरीफ़ नहीं लाए। फिर सुबह के वक़्त लोगों ने उसका ज़िक्र किया तो आप (सल्ल०) ने फ़रमाया कि मैं डरा कि कहीं रात की नमाज़ (तहज्जुद) तुम पर फ़र्ज़ न हो जाए। (इस ख़याल से मैंने यहाँ का आना नाग़ा कर दिया)।सहीह बुखारी Hadees No 729। Tahajjud Ki Namaz Ka Tarika

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حَدَّثَنَا أَبُو الْيَمَانِ ، قَالَ : أَخْبَرَنَا شُعَيْبٌ ، عَنِ الزُّهْرِيِّ ، قَالَ : عَنْ عُرْوَةُ ، أَنَّ عَائِشَةَ أَخْبَرَتْهُ ، أَنّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ كَانَ يُصَلِّي إِحْدَى عَشْرَةَ رَكْعَةً ، كَانَتْ تِلْكَ صَلَاتَهُ تَعْنِي بِاللَّيْلِ فَيَسْجُدُ السَّجْدَةَ مِنْ ذَلِكَ قَدْرَ مَا يَقْرَأُ أَحَدُكُمْ خَمْسِينَ آيَةً قَبْلَ أَنْ يَرْفَعَ رَأْسَهُ وَيَرْكَعُ رَكْعَتَيْنِ قَبْلَ صَلَاةِ الْفَجْرِ ، ثُمَّ يَضْطَجِعُ عَلَى شِقِّهِ الْأَيْمَنِ حَتَّى يَأْتِيَهُ الْمُؤَذِّنُ لِلصَّلَاةِ .

रसूलुल्लाह (सल्ल०) ग्यारह रकअतें (वित्र और तहज्जुद की) पढ़ते थे आप (सल्ल०) की यही नमाज़ थी। मुराद उन की रात की नमाज़ थी। आप (सल्ल०) का सजदा उन रकअतों मैं इतना लम्बा होता था कि सिर उठाने से पहले तुममें से कोई शख़्स भी पचास आयतें पढ़ सकता और फ़ज्र की नमाज़ फ़र्ज़ से पहले आप (सल्ल०) सुन्नत दो रकअतें पढ़ते थे उसके बाद (ज़रा देर) दाहिने पहलू पर लेट रहते यहाँ तक कि मुअज़्ज़न बुलाने के लिये आप (सल्ल०) के पास आता। सहीह बुखारी Hadees No 994।

حَدَّثَنَا أَبُو النُّعْمَانِ ، قَالَ : حَدَّثَنَا حَمَّادُ بْنُ زَيْدٍ ، قَالَ : حَدَّثَنَا أَنَسُ بْنُ سِيرِينَ ، قَالَ : قُلْتُ لِابْنِ عُمَرَ : أَرَأَيْتَ الرَّكْعَتَيْنِ قَبْلَ صَلَاةِ الْغَدَاةِ أُطِيلُ فِيهِمَا الْقِرَاءَةَ ، فَقَالَ : كَانَ النَّبِيُّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يُصَلِّي مِنَ اللَّيْلِ مَثْنَى مَثْنَى وَيُوتِرُ بِرَكْعَةٍ وَيُصَلِّي الرَّكْعَتَيْنِ قَبْلَ صَلَاةِ الْغَدَاةِ ، وَكَأَنَّ الْأَذَانَ بِأُذُنَيْهِ ، قَالَ حَمَّادٌ : أَيْ سُرْعَةً .

मुझे रसूलुल्लाह (सल्ल०) ने ये वसीयत फ़रमाई कि सोने से पहले वित्र पढ़ लिया करो।

हदीस: नमाज़ सुबह से पहले की दो रकअतों के मुताल्लिक़ आपका क्या ख़याल है? क्या मैं उनमें लम्बी क़िरअत कर सकता हूँ? उन्होंने फ़रमाया कि नबी करीम (सल्ल०) तो रात की नमाज़ (तहज्जुद) दो-दो रकअत करके पढ़ते थे।

फिर एक रकअत पढ़ कर उनको ताक़ बना लेते और सुबह की नमाज़ से पहले की दो रकअतें (सुन्नत फ़ज्र तो) इस तरह पढ़ते मानो अज़ान (इक़ामत) की आवाज़ आप के कान में पड़ रही है। हम्माद की उस से मुराद ये है कि आप जल्दी पढ़ लेते। सहीह बुखारी Hadees No 995।

حَدَّثَنَا مُسَدَّدٌ ، قَالَ : حَدَّثَنَا يَحْيَى ، قَالَ : حَدَّثَنَا هِشَامٌ ، قَالَ : حَدَّثَنِي أَبِي ، عَنْ عَائِشَةَ ، قَالَتْ : كَانَ النَّبِيُّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يُصَلِّي وَأَنَا رَاقِدَةٌ مُعْتَرِضَةً عَلَى فِرَاشِهِ ، فَإِذَا أَرَادَ أَنْ يُوتِرَ أَيْقَظَنِي فَأَوْتَرْتُ .

आप ने फ़रमाया, नबी करीम (सल्ल०) ( तहज्जुद की) नमाज़ पढ़ते रहते और मैं आप (सल्ल०) के बिस्तर पर चौड़ाई लेटी रहती। जब वित्र पढ़ने लगते तो मुझे भी जगा देते और मैं भी वित्र पढ़ लेती। सहीह बुखारी Hadees No 997। Tahajjud Ki Namaz Ka Tarika

तहज्जुद की नमाज़ Tahajjud Ki Namaz Ka Tarika Video :

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तहज्जुद की दुआ Tahajjud Ki Dua :

नबी करीम (सल्ल०) जब रात में तहज्जुद के लिये खड़े होते तो ये दुआ करते

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”ऐ अल्लाह! तेरे ही लिये तमाम तारीफ़ें हैं तू आसमान और ज़मीन और उन में मौजूद तमाम चीज़ों का नूर है तेरे ही लिये तमाम तारीफ़ें हैं तू आसमान और ज़मीन और उन में मौजूद तमाम चीज़ों का क़ायम रखने वाला है और तेरे ही लिये तमाम तारीफ़ें हैं तू हक़ है तेरा वादा हक़ है तेरा क़ौल हक़ है तुझसे मिलना हक़ है जन्नत हक़ है दोज़ख़ हक़ है क़ियामत हक़ है नबी हक़ हैं और मुहम्मद रसूलुल्लाह (सल्ल०) हक़ हैं।

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ऐ अल्लाह! तेरे सिपुर्द किया तुझ पर भरोसा किया तुझ पर ईमान लाया तेरी तरफ़ रुजू किया दुश्मनों का मामला तेरे सिपुर्द किया फ़ैसला तेरे सिपुर्द किया इसलिये मेरी अगली पिछली ग़लतियाँ माफ़ कर। वो भी जो मैंने छिप कर की हैं और वो भी जो खुल कर की हैं तो ही सबसे पहले है और तो ही सबसे बाद में है सिर्फ़ तो ही माबूद है और तेरे सिवा कोई माबूद नहीं।” Hadees No 6317 । dua e qunoot

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