सफर की दुआ हिंदी में | “Safar Ki Dua” Dua For Travel | (3) Best Safar Ki Dua In Hindi Retelad To Safar / Taravel

Safar Ki Dua In Hindi सफर शुरू करने से पहले सफर की दुआ जरूर पढ़नी चाहिए क्योंकि हमारे प्यारे नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम जब भी सफर करते थे safar ki dua hindi सफर की दुआ जरूर पढ़ते थे सफर की दुआ पढ़ने से हम अल्लाह की निगहबान में आ जाते हैं।

safar ki dua in urdu और अल्लाह ताला फरिश्तों के जरिए हमारी हिफाजत फरमाता है। Safar KI Dua , safar ki dua in hindi, safar ki dua in english , safar ki dua hindi, safar ki dua in urdu, safar ki dua urdu, safar ki dua hindi mein

Safar Ki Dua In Hindi सफर की दुआ :

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Safar Ki Dua In Hindi :- सुब्हानल्लजी सख्ख-र लाना हाज़ा व मा कुन्ना लहू मुकि्रनीन व इन्ना इला रब्बिना ल-मुन्क़लिबून।

सवारी पर सवार होने की दुआ Safar ki dua in urdu :

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सुब्हानल्लजी सख्ख-र लाना हाज़ा व मा कुन्ना लहू मुकि्रनीन व इन्ना इला रब्बिना ल-मुन्क़लिबून।

सफर के दरमियान की दुआ safar ki dua :

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अल्लाहुम-म इन्ना नस् अलु-क फ़ी स-फ़-रिना हाज़ल बिर-र वत्तक़्वा व मिनल अ-म लि मा तर्ज़ा अल्लाहुम-म हव्विन अलैना स-फ़-र-ना हाजा़ वत्वि-ल-ना बुअ् द हू अल्लाहुम-म अन्तस्साहिबु फ़िस्स-फ़-रि वल ख़लीफ़तु फि़ल अहिल अल्लाहुम-म इन्नी अअूज़ुबि-क मिंव-वअ् साइस्स-फ़ रि व का ब ति ल मन्ज़रि व सूइल मुन्क़-ल-बि फ़िल मालि वल अहि्ल व अअूज़ुबि-क मिनल हौरि बअ दल कौरि व दअ वतिल मज़्लूम ।

आप सल्ललाहु अलैहिवसल्लम जब सफर से वापस लौटे तो यही कलमात कहते और यह अल्फाज ज्यादा कहते⇓

Safar ki dua in hindi

अर्थ : हम वापस लौटने वाले तौबा करने वाले इबादत करने वाले अपने रब की हमद् करने वाले हैं.

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आप [SAW] के एक सफर का Waqia in Hindi :

मैंने नबी करीम (सल्ल०) से सुना आप (सल्ल०) ने फ़रमाया कि पहली उम्मत के तीन आदमी कहीं सफ़र में जा रहे थे। रात होने पर रात गुज़ारने के लिये उन्होंने एक पहाड़ की गुफा में पनाह ली और उसमें अन्दर दाख़िल हो गए। इतने में पहाड़ से एक चट्टान लुढ़की और उसने गुफा का मुँह बन्द कर दिया।

सबने कहा कि अब इस गुफा से तुम्हें कोई चीज़ निकालने वाली नहीं सिवा इसके कि तुम सब अपने सबसे ज़्यादा अच्छे अमल को याद करके अल्लाह तआला से दुआ करो। इस पर उन में से एक शख़्स ने अपनी दुआ शुरू की कि ऐ अल्लाह! मेरे माँ-बाप बहुत बूढ़े थे और मैं रोज़ाना उन से पहले घर में किसी को भी दूध नहीं पिलाता था न अपने बाल बच्चों को और न अपने ग़ुलाम वग़ैरा को।

एक दिन मुझे एक चीज़ की तलाश में रात हो गई और जब मैं घर वापस हुआ तो वो (मेरे माँ बाप) सो चुके थे। फिर मैंने उन के लिये शाम का दूध निकाला। जब उन के पास लाया तो वो सोए हुए थे। मुझे ये बात हरगिज़ अच्छी मालूम नहीं हुई कि उन से पहले अपने बाल बच्चों या अपने किसी ग़ुलाम को दूध पिलाऊँ इसलिये मैं उन के सिरहाने खड़ा रहा।

दूध का प्याला मेरे हाथ में था और मैं उन के जागने का इन्तिज़ार कर रहा था। यहाँ तक कि सुबह हो गई। अब मेरे माँ-बाप जागे और उन्होंने अपना शाम का दूध उस वक़्त पिया। ऐ अल्लाह! अगर मैंने ये काम सिर्फ़ तेरी रज़ा हासिल करने के लिये किया था तो इस चट्टान की आफ़त को हम से हटा दे। इस दुआ के नतीजा मैं वो गुफा थोड़ी सी खुल गई। मगर निकलना अब भी मुमकिन न था।

रसूलुल्लाह (सल्ल०) ने फ़रमाया कि फिर दूसरे ने दुआ की ऐ अल्लाह! मेरे चचा की एक लड़की थी। जो सबसे ज़्यादा मुझे महबूब थी मैंने उसके साथ बुरा काम करना चाहा लेकिन उसने न माना। उसी ज़माने में एक साल क़हत (सूखा) पड़ा। तो वो मेरे पास आई मैंने उसे एक सौ बीस दीनार इस शर्त पर दिये कि वो ख़िलवत मैं मुझ से बुरा काम कराए। चुनांचे वो राज़ी हो गई।

अब मैं उस पर क़ाबू पा चुका था। लेकिन उसने कहा कि तुम्हारे लिये मैं जायज़ नहीं करती कि इस मेहर को तुम हक़ के बग़ैर तोड़ो। ये सुन कर मैं अपने बुरे इरादे से बाज़ आ गया और वहाँ से चला आया। हालाँकि वो मुझे सबसे बढ़ कर महबूब थी और मैंने अपना दिया हुआ सोना भी वापस नहीं लिया। ऐ अल्लाह! अगर ये काम मैंने सिर्फ़ तेरी रज़ा के लिये किया था तो हमारी इस मुसीबत को दूर कर दे।

चुनांचे चट्टान ज़रा सी और खिसकी लेकिन अब भी उस से बाहर नहीं निकला जा सकता था। नबी करीम (सल्ल०) ने फ़रमाया, और तीसरे शख़्स ने दुआ की। ऐ अल्लाह! मैंने कुछ मज़दूर किये थे। फिर सब को उन की मज़दूरी पूरी दे दी। मगर एक मज़दूर ऐसा निकला कि वो अपनी मज़दूरी ही छोड़ गया। मैंने उसकी मज़दूरी को कारोबार मैं लगा दिया और बहुत कुछ नफ़ा हासिल हो गया फिर कुछ दिनों के बाद वही मज़दूर मेरे पास आया।

और कहने लगा अल्लाह के बन्दे ! मुझे मेरी मज़दूरी दे दे। मैंने कहा ये जो कुछ तू देख रहा है। ऊँट गाय बकरी और ग़ुलाम ये सब तुम्हारी मज़दूरी ही है। वो कहने लगा अल्लाह के बन्दे! मुझसे मज़ाक़ न कर। मैंने कहा, मैं मज़ाक़ नहीं करता चुनांचे उस शख़्स ने सब कुछ लिया और अपने साथ ले गया।

एक चीज़ भी उसमें से बाक़ी नहीं छोड़ी। तो ऐ अल्लाह! अगर मैंने ये सब कुछ तेरी रज़ा मन्दी हासिल करने के लिये किया था तो तू हमारी इस मुसीबत को दूर कर दे। चुनांचे वो चट्टान हट गई और वो सब बाहर निकल कर चले गए। सही बुखारी 2272 ।

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