Istikhara Dua In Hindi | English and Urdu

आज के इस लेख में Istikhara dua के बारे में जानेंगे , इस्ताखारा की दुआ किया है। इसको कैसे पढ़ा जाता है, इस लेख में हम ने सहीह बुखारी की 3 हदीस के ज़रिये आप को बतलाना चाहते हैं की इस्तिखारा कैसे किया जाता है। istikhara dua in english , istikhara dua in hindi,

Istikhara Dua Ka Tareeqa | इस्तीखरा का तरीक़ा हदीस :

Sahih Bukhari Hadees No : 1162

istikhara hadees
istikhara hadees

حَدَّثَنَا قُتَيْبَةُ , قَالَ : حَدَّثَنَا عَبْدُ الرَّحْمَنِ بْنُ أَبِي الْمَوَالِي ، عَنْ مُحَمَّدِ بْنِ الْمُنْكَدِرِ ، عَنْ جَابِرِ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُمَا , قَالَ : كَانَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يُعَلِّمُنَا الِاسْتِخَارَةَ فِي الْأُمُورِ كُلِّهَا ، كَمَا يُعَلِّمُنَا السُّورَةَ مِنَ الْقُرْآنِ , يَقُولُ : إِذَا هَمَّ أَحَدُكُمْ بِالْأَمْرِ فَلْيَرْكَعْ رَكْعَتَيْنِ مِنْ غَيْرِ الْفَرِيضَةِ ، ثُمَّ لِيَقُلِ اللَّهُمَّ إِنِّي أَسْتَخِيرُكَ بِعِلْمِكَ وَأَسْتَقْدِرُكَ بِقُدْرَتِكَ وَأَسْأَلُكَ مِنْ فَضْلِكَ الْعَظِيمِ ، فَإِنَّكَ تَقْدِرُ وَلَا أَقْدِرُ وَتَعْلَمُ وَلَا أَعْلَمُ وَأَنْتَ عَلَّامُ الْغُيُوبِ ،

اللَّهُمَّ إِنْ كُنْتَ تَعْلَمُ أَنَّ هَذَا الْأَمْرَ خَيْرٌ لِي فِي دِينِي وَمَعَاشِي وَعَاقِبَةِ أَمْرِي أَوْ قَالَ عَاجِلِ أَمْرِي وَآجِلِهِ فَاقْدُرْهُ لِي وَيَسِّرْهُ لِي ثُمَّ بَارِكْ لِي فِيهِ ، وَإِنْ كُنْتَ تَعْلَمُ أَنَّ هَذَا الْأَمْرَ شَرٌّ لِي فِي دِينِي وَمَعَاشِي وَعَاقِبَةِ أَمْرِي أَوْ قَالَ فِي عَاجِلِ أَمْرِي وَآجِلِهِ فَاصْرِفْهُ عَنِّي وَاصْرِفْنِي عَنْهُ ، وَاقْدُرْ لِي الْخَيْرَ حَيْثُ كَانَ ثُمَّ أَرْضِنِي ، قَالَ : وَيُسَمِّي حَاجَتَهُ .

रसूलुल्लाह (सल्ल०) हमें अपने तमाम मामलात में इस्तिख़ारा करने की इसी तरह तालीम देते थे जिस तरह क़ुरआन की कोई सूरा सिखलाते । आप (सल्ल०) फ़रमाते कि जब कोई अहम मामला तुम्हारे सामने हो तो फ़र्ज़ के अलावा दो रकअत नफ़ल पढ़ने के बाद ये दुआ पढ़े।

Istikhara dua
Istikhara dua

 اللَّهُمَّ إِنِّي أَسْتَخِيرُكَ بِعِلْمِكَ وَأَسْتَقْدِرُكَ بِقُدْرَتِكَ وَأَسْأَلُكَ مِنْ فَضْلِكَ الْعَظِيمِ ، فَإِنَّكَ تَقْدِرُ وَلَا أَقْدِرُ وَتَعْلَمُ وَلَا أَعْلَمُ وَأَنْتَ عَلَّامُ الْغُيُوبِ ، اللَّهُمَّ إِنْ كُنْتَ تَعْلَمُ أَنَّ هَذَا الْأَمْرَ خَيْرٌ لِي فِي دِينِي وَمَعَاشِي وَعَاقِبَةِ أَمْرِي أَوْ قَالَ عَاجِلِ أَمْرِي وَآجِلِهِ فَاقْدُرْهُ لِي وَيَسِّرْهُ لِي ثُمَّ بَارِكْ لِي فِيهِ ،

وَإِنْ كُنْتَ تَعْلَمُ أَنَّ هَذَا الْأَمْرَ شَرٌّ لِي فِي دِينِي وَمَعَاشِي وَعَاقِبَةِ أَمْرِي أَوْ قَالَ فِي عَاجِلِ أَمْرِي وَآجِلِهِ فَاصْرِفْهُ عَنِّي وَاصْرِفْنِي عَنْهُ ، وَاقْدُرْ لِي الْخَيْرَ حَيْثُ كَانَ ثُمَّ أَرْضِنِي ، قَالَ : وَيُسَمِّي حَاجَتَهُ .

(तर्जमा) ऐ मेरे अल्लाह! मैं तुझ से तेरे इल्म की बदौलत ख़ैर तलब करता हूँ और तेरी क़ुदरत की बदौलत तुझ से ताक़त माँगता हूँ और तेरे अज़ीम फ़ज़ल का तलबगार हूँ कि क़ुदरत तू ही रखता है और मुझे कोई क़ुदरत नहीं। इल्म तुझ ही को है और मैं कुछ नहीं जानता। और तू तमाम छिपी बातों को जानने वाला है।

ऐ मेरे अल्लाह! अगर तू जानता है कि ये काम जिसके लिये इस्तिख़ारा किया जा रहा है मेरे दीन दुनिया और मेरे काम के अंजाम के भरोसे से मेरे लिये बेहतर है या (आप ने ये फ़रमाया कि) मेरे लिये वक़्ती तौर पर और अंजाम के एतिबार से ये (ख़ैर है) तो उसे मेरे लिये नसीब कर और उसका हासिल करना मेरे लिये आसान कर और फिर उसमें मुझे बरकत अता कर और अगर तू जानता है कि ये काम मेरे दीन दुनिया और मेरे काम के अंजाम के एतिबार से बुरा है।

या (आप (सल्ल०) ने ये कहा कि) मेरे मामले में वक़्ती तौर पर और अंजाम के एतिबार से ( बुरा है) तो उसे मुझसे हटा दे और मुझे भी उस से हटा दे। फिर मेरे लिये ख़ैर मुक़द्दर फ़रमा दे जहाँ भी वो हो और उस से मेरे दिल को मुत्मइन भी कर दे। आप (सल्ल०) ने फ़रमाया कि इस काम की जगह उस काम का नाम ले। Hadees No 1162,

Istikhara dua in English :

Istikhara dua in english
Istikhara dua in english

Allaahumma ‘innee ‘astakheeruka bi’ilmika, wa ‘astaqdiruka biqudratika, wa ‘as’aluka min fajhilikal-‘Adheemi, fa’innaka taqdiru wa laa ‘aqdiru, wa ta’lamu, wa laa ‘a’lamu, wa ‘Anta ‘Allaamul-Ghuyoob,

Allaahumma ‘in kunta ta’lamu ‘anna haazal-‘amra Khayrun lee fee deenee wa ma’aashee wa ‘aaqibati ‘amree Faqdurhu lee wa yassirhu lee summa baarik lee feehi, wa ‘in kunta ta’lamu ‘anna haazal-‘amra sharrun lee fee deenee wa ma’aashee wa ‘aaqibati ‘amree, Fasrifhu ‘annee wasrifnee ‘anhu waqdur liyal-khayra haythu kaana thumma ‘ardhinee bihi.

Sahih Bukhari Hadees No : 6382

Istikhara Hadees
Istikhara Hadees

حَدَّثَنَا مُطَرِّفُ بْنُ عَبْدِ اللَّهِ أَبُو مُصْعَبٍ ، حَدَّثَنَا عَبْدُ الرَّحْمَنِ بْنُ أَبِي الْمَوَالِ ، عَنْ مُحَمَّدِ بْنِ الْمُنْكَدِرِ ، عَنْ جَابِرٍ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ ، قَالَ : كَانَ النَّبِيُّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يُعَلِّمُنَا الِاسْتِخَارَةَ فِي الْأُمُورِ كُلِّهَا ، كَالسُّورَةِ مِنَ الْقُرْآنِ : إِذَا هَمَّ بِالْأَمْرِ فَلْيَرْكَعْ رَكْعَتَيْنِ ، ثُمَّ يَقُولُ : اللَّهُمَّ إِنِّي أَسْتَخِيرُكَ بِعِلْمِكَ ، وَأَسْتَقْدِرُكَ بِقُدْرَتِكَ ،

وَأَسْأَلُكَ مِنْ فَضْلِكَ الْعَظِيمِ ، فَإِنَّكَ تَقْدِرُ وَلَا أَقْدِرُ ، وَتَعْلَمُ وَلَا أَعْلَمُ ، وَأَنْتَ عَلَّامُ الْغُيُوبِ ، اللَّهُمَّ إِنْ كُنْتَ تَعْلَمُ أَنَّ هَذَا الْأَمْرَ خَيْرٌ لِي فِي دِينِي وَمَعَاشِي وَعَاقِبَةِ أَمْرِي ، أَوْ قَالَ فِي عَاجِلِ أَمْرِي ، وَآجِلِهِ ، فَاقْدُرْهُ لِي ، وَإِنْ كُنْتَ تَعْلَمُ أَنَّ هَذَا الْأَمْرَ شَرٌّ لِي فِي دِينِي وَمَعَاشِي وَعَاقِبَةِ أَمْرِي ، أَوْ قَالَ فِي عَاجِلِ أَمْرِي ، وَآجِلِهِ ، فَاصْرِفْهُ عَنِّي وَاصْرِفْنِي عَنْهُ ، وَاقْدُرْ لِي الْخَيْرَ حَيْثُ كَانَ ، ثُمَّ رَضِّنِي بِهِ وَيُسَمِّي حَاجَتَهُ .

रसूलुल्लाह (सल्ल०) हमें तमाम मामलात में इस्तिख़ारे की तालीम देते थे क़ुरआन की सूरा की तरह (नबी करीम (सल्ल०) ने फ़रमाया) जब तुममें से कोई शख़्स किसी (जायज़) काम का इरादा करे (अभी पक्का पक्का इरादा न हुआ हो) तो दो रकअतें (नफ़ल) पढ़े उसके बाद इस तरह दुआ करे।

कि ऐ अल्लाह! मैं भलाई माँगता हूँ (इस्तिख़ारा) तेरी भलाई से तो इल्म वाला है मुझे इल्म नहीं और तो तमाम छिपा हुआ बातों को जानने वाला है ऐ अल्लाह! अगर तू जानता है कि ये काम मेरे लिये बेहतर है मेरे दीन के एतिबार से मेरी रोज़ी-रोटी और मेरे अंजाम कार के एतिबार से या दुआ में ये अलफ़ाज़ कहे।

(فِي عَاجِلِ أَمْرِي ، وَآجِلِهِ ، )

तो उसे मेरे लिये मुक़द्दर कर दे और अगर तू जानता है कि ये काम मेरे लिये बुरा है मेरे दीन के लिये मेरी ज़िन्दगी के लिये और मेरे अंजाम कार के लिये या ये अलफ़ाज़ फ़रमाए।

(فِي عَاجِلِ أَمْرِي ، وَآجِلِهِ ، )

तो उसे मुझसे फेर दे और मुझे उस से फेर दे और मेरे लिये भलाई मुक़द्दर कर दे जहाँ कहीं भी वो हो और फिर मुझे उस से मुत्मइन कर दे (ये दुआ करते वक़्त) अपनी ज़रूरत का बयान कर देना चाहिये। Hadees No 6382

Istikhara dua in hindi :

Istikhara dua in hindi
Istikhara dua in hindi

अल्लाहुम म इन्नी अस्तख़ी रू-क बि अिल्म-क व अस्तकि़्दरू-क बि कु़द्रति-क व अस्अलु-क मिन फ़ज़ि्ल-कल अजी़मि फ़ इन-न-क तकि्दरू व ला अकि़्दरू व तअ़लमु व ला अअ्लमु व अन-त अल्लामुल ग़ुयूबि अल्लाहुम-म इन कुन-त तअ्लमु अन-न हाज़ल अम-र खै़रूल्ली फी़ दीनी व मआशी व आक़िबति अम्री फ़क़ि्दरहु ली व यस्सिरहु ली सुम-म बारिक ली फ़ीहि व। इन कुन-त तअ्लमु अन-न हाज़ल अम-र शर्रूल-ली फ़ी दीनी व मआशी व आक़िबति अमरी फ़स् -रिफ़हु अन्नी वसि्रफ़्नी अन्हु वकि्दर लि-यल खै-र हैसु का-नर सुम अर्जिनी बिही।

Sahih Bukhari Hadees No : 7390

Istikhara Hadees
Istikhara Hadees

حَدَّثَنِي إِبْرَاهِيمُ بْنُ الْمُنْذِرِ ، حَدَّثَنَا مَعْنُ بْنُ عِيسَى ، حَدَّثَنِي عَبْدُ الرَّحْمَنِ بْنُ أَبِي الْمَوَالِي ، قَالَ : سَمِعْتُ مُحَمَّدَ بْنَ الْمُنْكَدِرِ يُحَدِّثُ ، عَبْدَ اللَّهِ بْنَ الْحَسَنِ ، يَقُولُ : أَخْبَرَنِي جَابِرُ بْنُ عَبْدِ اللَّهِ السَّلَمِيُّ ، قَالَ : كَانَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يُعَلِّمُ أَصْحَابَهُ الِاسْتِخَارَةَ فِي الْأُمُورِ كُلِّهَا كَمَا يُعَلِّمُهُمُ السُّورَةَ مِنَ الْقُرْآنِ ،

يَقُولُ : إِذَا هَمَّ أَحَدُكُمْ بِالْأَمْرِ ، فَلْيَرْكَعْ رَكْعَتَيْنِ مِنْ غَيْرِ الْفَرِيضَةِ ، ثُمَّ لِيَقُلْ : اللَّهُمَّ إِنِّي أَسْتَخِيرُكَ بِعِلْمِكَ ، وَأَسْتَقْدِرُكَ بِقُدْرَتِكَ ، وَأَسْأَلُكَ مِنْ فَضْلِكَ ، فَإِنَّكَ تَقْدِرُ وَلَا أَقْدِرُ ، وَتَعْلَمُ وَلَا أَعْلَمُ ، وَأَنْتَ عَلَّامُ الْغُيُوبِ ، اللَّهُمَّ فَإِنْ كُنْتَ تَعْلَمُ هَذَا الْأَمْرَ ، ثُمَّ تُسَمِّيهِ بِعَيْنِهِ خَيْرًا لِي فِي عَاجِلِ أَمْرِي وَآجِلِهِ ، قَالَ : أَوْ فِي دِينِي وَمَعَاشِي وَعَاقِبَةِ أَمْرِي ،

فَاقْدُرْهُ لِي وَيَسِّرْهُ لِي ، ثُمَّ بَارِكْ لِي فِيهِ ، اللَّهُمَّ وَإِنْ كُنْتَ تَعْلَمُ أَنَّهُ شَرٌّ لِي فِي دِينِي وَمَعَاشِي وَعَاقِبَةِ أَمْرِي ، أَوْ قَالَ : فِي عَاجِلِ أَمْرِي وَآجِلِهِ ، فَاصْرِفْنِي عَنْهُ وَاقْدُرْ لِي الْخَيْرَ حَيْثُ كَانَ ، ثُمَّ رَضِّنِي بِهِ .

मुझे जाबिर-बिन-अब्दुल्लाह सलमा (रज़ि०) ने ख़बर दी उन्होंने कहा कि रसूलुल्लाह (सल्ल०) अपने सहाबा को हर जायज़ काम में इस्तिख़ारा करना सिखाते थे जिस तरह आप क़ुरआन की सूरा सिखाते थे। आप (सल्ल०) फ़रमाते कि जब तुममें से कोई किसी काम का मक़सद करे तो उसे चाहिये कि फ़र्ज़ के सिवा दो रकअत नफ़ल नमाज़ पढ़े फिर सलाम के बाद ये दुआ करे ”ऐ अल्लाह! मैं तेरे इल्म के तुफ़ैल इस काम में ख़ैरियत तलब करता हूँ और तेरी क़ुदरत के तुफ़ैल ताक़त माँगता हूँ और तेरा फ़ज़ल।

क्योंकि तुझे क़ुदरत है और मुझे नहीं तू जानता है और मैं नहीं जानता। और तू ग़ैब का बहुत जानने वाला है। ऐ अल्लाह! इसलिये अगर तू ये बात जानता है (उस वक़्त इस्तिख़ारा करने वाले को इस काम का नाम लेना चाहिये) कि इस काम में मेरे लिये दुनिया और आख़िरत में भलाई है या इस तरह फ़रमाया कि “मेरे दीन में और गुज़रान में और मेरे हर अंजाम के एतिबार से भलाई है तो इस पर मुझे क़ादिर बना दे और मेरे लिये इसे आसान कर दे फिर उसमें मेरे लिये बरकत अता फ़रमा। ऐ अल्लाह! और अगर तू जानता है कि ये काम मेरे लिये बुरा है।

मेरे दीन और गुज़ारे के एतिबार से और मेरे अंजाम के एतिबार से या फ़रमाया कि मेरी दुनिया और दीन के एतिबार से तू मुझे इस काम से दूर कर दे और मेरे लिये भलाई मुक़द्दर कर दे जहाँ भी वो हो और फिर मुझे इस पर राज़ी और ख़ुश रख। 7390 Click For Istikhara Video

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