Isha Ki Namaz Ki Rakat : ईशा की नमाज़ में कितने रकात हैं | Isha Ki Namaz Best Tarika In 1 Article

आज की लेख  में हम Isha Ki Namaz Ki Rakat के बारे में जानेंगे ईशा की नमाज को किस तरह से अदा की जाती है Isha Ki Namaz कब अदा की जाती है ईशा की नमाज में कितनी रकात हैं आज के इस लेख में हम पूरी तरीके से जानेंगे कि कैसे ईशा की नमाज पढ़ी जाती है मुझे उम्मीद है आप सभी को यह लेख पसंद आएगी और इससे आपको हेल्प मिलेगा। Isha Ki Namaz Ki Rakat, Isha Ki Namaz, Isha Ki Namaz Rakat, Isha Ki Namaz Ka Tarika.

अगर आप भी ईशा की नमाज का तरीका के बारे में सर्च कर रहे हैं तो आप सही जगह पर आए हैं आपको इस लेख में ईशा की नमाज के बारे में पूरा डिटेल मिलेगा और आप अच्छे से समझ पाएंगे और आप ईशा की नमाज को सही तरीके से पढ़ पाएंगे। Isha Ki Namaz Mein Kitni Rakat Hoti Hai

अल्लाह ताला ने हम पर पांच नमाजे फ़र्ज़ की  है आज के इस लेख में हम ईशा की नमाज के बारे में जानेंगे ईशा की नमाज पांचों नमाज की आखिरी नमाज है ईशा की नमाज में कुल 17 रकात है चलिए ईशा की नमाज का तरीका के बारे में अच्छी तरीके से जानते हैं।

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Isha Ki Namaz Ki Rakat : ईशा की नमाज़ में कितने रकात हैं

ईशा की नमाज में कुल 17 रकात है आइए हम स्टेप बाय स्टेप समझते हैं, ईशा की नमाज में सबसे पहले 4 रकात सुन्नत गैर मुअक्किदा है, फिर 4 रकात फर्ज नमाज़ है, फिर 2 रकात सुन्नत एमुअक्किदा है, फिर 2 रकात नफिल है और उसके बाद 3 रकात वित्र और फिर 2 रकात नफिल नमाज है, इस तरीके से ईशा की नमाज में कुल 17 रकात पूरे होते हैं।

  • 4 रकात सुन्नत गैर मुअक्किदा
  • 4 रकात फर्ज नमाज़ 
  • 2 रकात सुन्नत एमुअक्किदा
  • 2 रकात नफिल
  • 3 रकात वित्र
  • 2 रकात नफिल

ईशा की नमाज़ की नियत कैसे करें : Isha Ki Namaz Ki Rakat

ईशा की नमाज की नियत आइये जानते हैं हम कैसे करेंगे अगर हम सुन्नत नमाज़ पढ़ रहे हैं तो कैसे किया जाएगा और फर्ज नमाज पढ़ रहे हैं तो उस वक्त कैसे किया जाएगा। Azan ke baad ki dua 

  • 4 रकात सुन्नत की नियत

नियत करता हूं मैं 4 रकात सुन्नत नमाज ईशा की वास्ते अल्लाह ताआला के मुंह मेरा काबा शरीफ के तरफ अल्लाहू अकबर।

  • ईशा की 4 रकात फर्ज नमाज की नियत

नियत की मैंने 4 चार रकआत फर्ज नमाज ईशा की वास्ते अल्लाह तआला के मुंह मेरा कआबा शरीफ की तरफ अल्लाहु अकबर।

ध्यान रहे आप इमाम के पीछे नमाज पढ़ रहे हैं तो आपको नीचे दिए गए इस तरह से 4 रकात फर्ज नमाज़ की नियत करनी है।

नियत करता हूं मैं 4 रकात फ़र्ज़ नमाज ईशा की वास्ते अल्लाह ताआला के पीछे इस इमाम के मुंह मेरा काबा शरीफ के तरफ अल्लाहू अकबर। Dua E Qunoot केलिए दबाएं 

  • 2 रकात सुन्नत की नियत

नियत करता हूं मैं 2 रकात सुन्नत नमाज ईशा की वास्ते अल्लाह ताआला के मुंह मेरा काबा शरीफ के तरफ अल्लाहू अकबर।

  • 2 रकात नफिल की नियत

नियत करता हूं मैं 2 रकात नफिल नमाज ईशा की वास्ते अल्लाह ताआला के मुंह मेरा काबा शरीफ के तरफ अल्लाहू अकबर।

  • 3 रकात वित्र की नियत

नियत करता हूं मैं 3 रकात वित्र की वास्ते अल्लाह ताआला के मुंह मेरा काबा शरीफ के तरफ अल्लाहू अकबर।

  • 2 रकात नफिल की नियत

नियत करता हूं मैं 2 रकात नफिल नमाज ईशा की वास्ते अल्लाह ताआला के मुंह मेरा काबा शरीफ के तरफ अल्लाहू अकबर।

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ईशा की नमाज़ से जुडी कुछ कुछ हदीस : Namaz Ki Hadees In Hindi

नबी करीम (सल्ल०) ने फ़रमाया, ”रात का अँधेरा शुरू होने पर या रात शुरू होने पर अपने बच्चों को अपने पास (घर में) रोक लो  क्योंकि शैतान उसी वक़्त फैलना शुरू करते हैं। फिर जब इशा के वक़्त में से एक घड़ी गुज़र जाए तो उन्हें छोड़ दो। 

(चलें-फिरें) फिर अल्लाह का नाम ले कर अपना दरवाज़ा बन्द करो अल्लाह का नाम ले कर अपना चराग़ बुझा दो  पानी के बर्तन अल्लाह का नाम ले कर ढक दो  और दूसरे बर्तन भी अल्लाह का नाम ले कर ढक दो (और अगर ढक्कन न हो) तो बीच में ही कोई चीज़ रख दो।” Sahih Bukhari Hadees No 3280  

हुज्जाज का ज़माना आया (और वो नमाज़ देर करके पढ़ाया करता था इस लिये) हमने जाबिर-बिन-अब्दुल्लाह (रज़ि०) से उसके बारे में पूछा तो उन्होंने फ़रमाया कि नबी करीम (सल्ल०) ज़ोहर की नमाज़ ठीक दोपहर मैं पढ़ाया करते थे। अभी सूरज साफ़ और रौशन होता तो नमाज़े-अस्र पढ़ाते। मग़रिब की नमाज़ का वक़्त आते ही पढ़ाते और नमाज़ इशा को कभी जल्दी पढ़ाते और कभी देर से। 

जब देखते कि लोग जमा हो गए हैं तो जल्दी पढ़ा देते और अगर लोग जल्दी जमा न होते तो नमाज़ में देर करते, (और लोगों का इन्तिज़ार करते) और सुबह की नमाज़ सहाबा (रज़ि०) या (ये कहा कि) नबी करीम (सल्ल०) अँधेरे मैं पढ़ते थे।Sahih Bukhari Hadees No 560

एक रात नबी करीम (सल्ल०) ने हमें इशा की नमाज़ पढ़ाई। यही जिसे लोग अतमा कहते हैं। फिर हमें ख़िताब करते हुए फ़रमाया कि तुम इस रात को याद रखना। आज जो लोग ज़िन्दा हैं एक सौ साल के गुज़रने तक रूए-ज़मीन पर उन में से कोई भी बाक़ी नहीं रहेगा। Sahih Bukhari Hadees No 564 Namaz Ka Tarika

एक रात रसूलुल्लाह (सल्ल०) ने इशा की नमाज़ देर से पढ़ी। ये इस्लाम के फैलने से पहले का वाक़िआ है। आप (सल्ल०) उस वक़्त तक बाहर तशरीफ़ नहीं लाए जब तक उमर (रज़ि०) ने ये न फ़रमाया कि औरतें और बच्चे सो गए। इसलिये आप (सल्ल०) तशरीफ़ लाए और फ़रमाया कि तुम्हारे अलावा दुनिया में कोई भी इन्सान इस नमाज़ का इन्तिज़ार नहीं करता। Sahih Bukhari Hadees No 566 

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