Dua E Masura दुआ मासुरा | Hindi English Arbic | Best Dua | Dua E Masura For Namaz

Dua Masura  कब पढ़ी जाती है? दुआ ए मसुरा हर नमाज के क़ायदा की हालात में अत्तहियात और दुरूदे इब्राहिम के बाद और सलाम फेर ने से पहले पढ़ी जाती है दुआ ए मसुरा की बहुत सारी दुआएं हैं लेकिन सब से जीयदा ये Dua E Masura  पढ़ी जाती है आप ये पढ़ सकते हैं. Dua e Masura, dua e masura in hind, dua e masura in english, dua masura in english, dua masura in hindi. Dua E Qunoot

Dua E Masura In Hindi | दुआ मासुरा 

अल्लाहुम्मा इन्नी ज़लमतू नफ़्सी ज़ुलमन कसीरा, वला यग़फिरुज़-ज़ुनूबा इल्ला अनता, फग़फिरली मग़ फि-र-तम्मिन ‘इनदिका, वर ‘हमनी इन्नका अनतल ग़फ़ूरूर्र रहीम.

Dua E Masura In HIndi , Dua masura

 दुआ ए मासुरा तर्जुमा | Dua E Masura Tarjuma :

ए अल्लाह हमने अपनी जान पर बहुत जुल्म किया है और गुनाहों को तेरे सिवा कोई माफ नहीं कर सकता हमारी मग फिरत फरमा ऐसे मग फिरत जो तेरे पास से हो और हम पर रहम कर बेशक तू बड़ा मग फिरत करने वाला और रहम करने वाला है।

Dua E Masura In English | With Meaning

Allahumma Inni Zalamtu Nafsi, Zulman Kaseeraan, Wala Yaghfiruz-Zunooba Illa Anta Faghfirlee Maghfiratan-mMin ‘Indika War Hamnee Innakaa Antal Ghafoorur Raheem

Dua E Masura In English , dua masura

Dua Masura | With Translation In English

O Allah, I have greatly wronged myself, and no one forgives sins but you. So, grant me forgiveness and have mercy on me. Surely, You are Forgiving, Merciful.

Dua E Masura In Hadith |  सहीह बुखारी हदीस :

حَدَّثَنَا قُتَيْبَةُ بْنُ سَعِيدٍ، قَالَ حَدَّثَنَا اللَّيْثُ، عَنْ يَزِيدَ بْنِ أَبِي حَبِيبٍ، عَنْ أَبِي الْخَيْرِ، عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عَمْرٍو، عَنْ أَبِي بَكْرٍ الصِّدِّيقِ ـ رضى الله عنه ـ‏.‏ أَنَّهُ قَالَ لِرَسُولِ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم عَلِّمْنِي دُعَاءً أَدْعُو بِهِ فِي صَلاَتِي‏.‏ قَالَ ‏ “‏ قُلِ اللَّهُمَّ إِنِّي ظَلَمْتُ نَفْسِي ظُلْمًا كَثِيرًا وَلاَ يَغْفِرُ الذُّنُوبَ إِلاَّ أَنْتَ، فَاغْفِرْ لِي مَغْفِرَةً مِنْ عِنْدِكَ، وَارْحَمْنِي إِنَّكَ أَنْتَ الْغَفُورُ الرَّحِيمُ ‏”‏‏.‏

उन्होंने रसूलुल्लाह (सल्ल०) से कहा कि आप (सल्ल०) मुझे कोई ऐसी दुआ सिखा दीजिये जिसे मैं नमाज़ में पढ़ा करूँ। आपने फ़रमाया कि ये दुआ पढ़ा करो

 اللَّهُمَّ إِنِّي ظَلَمْتُ نَفْسِي ظُلْمًا كَثِيرًا وَلاَ يَغْفِرُ الذُّنُوبَ إِلاَّ أَنْتَ، فَاغْفِرْ لِي مَغْفِرَةً مِنْ عِنْدِكَ، وَارْحَمْنِي إِنَّكَ أَنْتَ الْغَفُورُ الرَّحِيمُ ‏”‏‏.‏

Dua E Masura In Arbic

ऐ अल्लाह! मैंने अपनी जान पर (गुनाह करके) बहुत ज़्यादा ज़ुल्म किया इसलिये गुनाहों को तेरे सिवा कोई दूसरा माफ़ करने वाला नहीं। मुझे अपने पास से भरपूर मग़फ़िरत अता फ़रमा और मुझ पर रहम कर, कि मग़फ़िरत करने वाला और रहम करने वाला बेशक तू ही है। Sahih al-Bukhari 834 istikhara dua 

रसूलुल्लाह (सल्ल०) नमाज़ में ये दुआ पढ़ते थे | Namaz Ki hadees In Hindi

اللَّهُمَّ إِنِّي أَعُوذُ بِكَ مِنْ عَذَابِ الْقَبْرِ ، وَأَعُوذُ بِكَ مِنْ فِتْنَةِ الْمَسِيحِ الدَّجَّالِ ، وَأَعُوذُ بِكَ مِنْ فِتْنَةِ الْمَحْيَا وَفِتْنَةِ الْمَمَاتِ ، اللَّهُمَّ إِنِّي أَعُوذُ بِكَ مِنَ الْمَأْثَمِ وَالْمَغْرَمِ

ऐ अल्लाह क़ब्र के अज़ाब से मैं तेरी पनाह माँगता हों। ज़िन्दगी के और मौत के फ़ितनों से तेरी पनाह माँगता हों। दज्जाल के फ़ितना से तेरी पनाह माँगता हूँ और ऐ अल्लाह मैं तेरी पनाह माँगता हूँ गुनाहों से और क़र्ज़ से। 

किसी (यानी उम्मुल-मोमिनीन आयशा सिद्दीक़ा (रज़ि०)) ने नबी करीम (सल्ल०) से कहा कि आप (सल्ल०) तो क़र्ज़ से बहुत ही ज़्यादा पनाह माँगते हैं ! इस पर आप (सल्ल०) ने फ़रमाया कि जब कोई मक़रूज़ हो जाए तो वो झूट बोलता है और वादा ख़िलाफ़ हो जाता है। Sahih al-Bukhari 832

अल्लाह पर सलाम भेजना सही है या नहीं ? सहीह बुखारी हदीस में :

(पहले) जब हम नबी करीम (सल्ल०) के साथ नमाज़ पढ़ते तो हम (क़अदा में) ये कहा करते थे कि उसके बन्दों की तरफ़ से अल्लाह पर सलाम हो और फ़ुलाँ पर और फ़ुलाँ पर सलाम हो। इस पर नबी करीम (सल्ल०) ने फ़रमाया कि ये न कहो कि “अल्लाह पर सलाम हो” क्योंकि अल्लाह तो ख़ुद सलाम है। बल्कि ये कहो

(التحيات لله ، ‏‏‏‏ والصلوات والطيبات ، ‏‏‏‏ السلام عليك أيها النبي ورحمة الله وبركاته ، ‏‏‏‏ السلام علينا وعلى عباد الله الصالحين‏)

आदाबे-बन्दगान और तमाम इबादतों और तमाम पाकीज़ा ख़ैरातें अल्लाह ही के लिये हैं, आप पर ऐ नबी सलाम हो और अल्लाह की रहमतें और बरकतें नाज़िल हों, हम पर और अल्लाह के सालेह बन्दों पर सलाम हो और जब तुम ये कहोगे तो आसमान पर अल्लाह के तमाम बन्दों को पहुँचेगा, आप (सल्ल०) ने फ़रमाया कि आसमान और ज़मीन के बीच तमाम बन्दों को पहुँचेगा

(أشهد أن لا إله إلا الله ، ‏‏‏‏ وأشهد أن محمدا عبده ورسوله)

मैं शहादत देता हूँ कि अल्लाह के सिवा कोई माबूद नहीं और मैं शहादत देता हूँ कि मुहम्मद उसके बन्दे और रसूल हैं। उसके बाद दुआ का इख़्तियार है जो उसे पसन्द हो करे।Sahih Bukhari Hadith No : 835

کیا اللہ پر درود بھیجنا درست ہے یا نہیں؟ صحیح بخاری کی حدیث میں۔

( پہلے ) جب ہم نبی کریم ﷺ کے ساتھ نماز پڑھتے تو ہم ( قعدہ میں ) یہ کہا کرتے تھے کہ اس کے بندوں کی طرف سے اللہ پر سلام ہو اور فلاں پر اور فلاں پر سلام ہو ۔ اس پر نبی کریم ﷺ نے فرمایا کہ یہ نہ کہو کہ ” اللہ پر سلام ہو “ کیونکہ اللہ تو خود سلام ہے ۔

بلکہ یہ کہو ( ترجمہ ) آداب بندگان اور تمام عبادات اور تمام پاکیزہ خیراتیں اللہ ہی کے لیے ہیں آپ پر اے نبی سلام ہو اور اللہ کی رحمتیں اور برکتیں نازل ہوں ہم پر اور اللہ کے صالح بندوں پر سلام ہو اور جب تم یہ کہو گے تو آسمان پر خدا کے تمام بندوں کو پہنچے گا ۔

آپ ﷺ نے یہ فرمایا کہ آسمان اور زمین کے درمیان تمام بندوں کو پہنچے گا میں گواہی دیتا ہوں کہ اللہ کے سوا کوئی معبود نہیں اور میں گواہی دیتا ہوں کہ حضرت محمد ﷺ اس کے بندے اور رسول ہیں ۔ اس کے بعد دعا کا اختیار ہے جو اسے Sahih Bukhari Hadith No : 835 پسند ہو کرے ۔

Is it right to send salutations to Allah or not? In Sahih Bukhari Hadith :

Narrated `Abdullah: When we prayed with the Prophet we used to say, Peace be on Allah from His slaves and peace be on so and so. The Prophet said, Don’t say As-Salam be on Allah, for He Himself is As-Salam, but say, at-tahiyatu li l-lahi wa s-salawatu wa t-taiyibat. As-salamu `alaika aiyuha n-Nabiyu wa rahmatu l-lahi wa barakatuh.

As-salamu `alaina wa `ala `ibadi l-lahi s-salihin. (If you say this then it will reach all the slaves in heaven or between heaven and earth). Ash-hadu al la-ilaha illa l-lah, wa ash-hadu anna Muhammadan `Abduhu wa Rasuluh.’ Then select the invocation you like best and recite it. (See Hadith No. 794, 795 & 796).Sahih Bukhari Hadith No : 835

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